Section 109 of BNS in Hindi
भारत में कानून बदल रहा है। Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) 2023 ने पुराने Indian Penal Code की जगह ली है। इसमें हत्या के प्रयत्न के लिए धारा 109 बनाई गई है। अगर कोई किसी को मारने की कोशिश करे लेकिन सफल न हो, तो यही धारा लागू होती है। यह एक गंभीर अपराध है और इसकी सजा भी कड़ी है।
Section 109 of BNS in Hindi समझना हर नागरिक के लिए जरूरी है। यह धारा बताती है कि हत्या का इरादा रखना और उसके लिए कदम उठाना — दोनों मिलकर अपराध बनते हैं। सजा 10 साल से लेकर मृत्युदंड तक हो सकती है। इस लेख में हम इसे सरल भाषा में, उदाहरणों के साथ समझेंगे।
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Section 109 of BNS in Hindi: हत्या का प्रयास
हत्या का प्रयास एक गंभीर आपराधिक अपराध है। इसमें वह स्थिति शामिल होती है जब कोई व्यक्ति किसी को मारने की नीयत से कोई कदम उठाता है, लेकिन किसी कारण से मृत्यु नहीं होती। BNS 2023 की धारा 109 इसी अपराध को परिभाषित करती है और उसके लिए स्पष्ट सजा का प्रावधान करती है।
यह धारा पुराने IPC की धारा 307 की जगह लागू हुई है। दोनों का उद्देश्य एक ही है — जानलेवा हमला करने वाले को कानून के दायरे में लाना। हालांकि BNS में कुछ नए प्रावधान और स्पष्टता जोड़ी गई है, जो इसे और प्रभावी बनाती है।
हत्या का प्रयास Bharatiya Nyaya Sanhita 2023
Bharatiya Nyaya Sanhita 2023 के अंतर्गत हत्या के प्रयत्न को दो उपधाराओं में विभाजित किया गया है। पहली उपधारा सामान्य व्यक्तियों पर लागू होती है और दूसरी उन लोगों पर जो पहले से आजीवन कारावास की सजा भोग रहे हैं। यह विभाजन न्यायसंगत और तार्किक है क्योंकि दोनों स्थितियों की गंभीरता अलग होती है।
आपराधिक आशय (Criminal intent) इस धारा का केंद्रीय तत्व है। बिना आशय के कोई भी कृत्य इस धारा के अंतर्गत नहीं आएगा। इसीलिए अदालतें हमेशा यह जाँचती हैं कि अभियुक्त का इरादा वास्तव में हत्या का था या नहीं।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) – धारा 109
यह धारा भारतीय दंड कानून 2023 का एक अहम हिस्सा है। यह न केवल अपराध को परिभाषित करती है बल्कि उसके परिणामों को भी स्पष्ट करती है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
1. मूल पाठ (Original Text)
धारा 109 की उपधारा (1) के अनुसार: जो कोई किसी कृत्य को ऐसे आशय या ज्ञान से और ऐसी परिस्थितियों में करता है कि यदि वह उस कृत्य द्वारा मृत्यु कारित कर देता तो हत्या का दोषी होता — वह दस वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दण्डनीय होगा। यदि उस कृत्य से किसी को चोट भी लग जाती है, तो सजा आजीवन कारावास तक हो सकती है।
उपधारा (2) उन मामलों को कवर करती है जहाँ अपराधी पहले से ही आजीवन कारावास की सजा काट रहा हो। ऐसे में अगर वह किसी को चोट पहुँचाता है, तो उसे मृत्युदंड या शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास दिया जा सकता है। यह प्रावधान जेल में भी कानून के शासन को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।
2. सजा का फ्लोचार्ट (Flow Chart)
धारा 109 की सजा को समझना आसान है अगर इसे एक संरचित तरीके से देखा जाए। नीचे दी गई तालिका इसे स्पष्ट करती है:
| स्थिति | व्यक्ति की श्रेणी | सजा का प्रावधान |
| चोट नहीं लगी | सामान्य व्यक्ति | 10 वर्ष तक कारावास + जुर्माना |
| चोट लग गई | सामान्य व्यक्ति | आजीवन कारावास या 10 वर्ष + जुर्माना |
| चोट लग गई | आजीवन कैदी | मृत्युदंड या शेष प्राकृत जीवन कारावास |
इस फ्लोचार्ट से साफ है कि गंभीर चोट और आपराधिक दायित्व का सीधा संबंध है। जितनी गंभीर चोट, उतनी कड़ी सजा। यह सिद्धांत न्याय की मूल भावना को दर्शाता है।
जीवन कारावास प्रावधान को और खास बनाती है उपधारा (2)। अगर कोई पहले से ही आजीवन कैदी है और फिर भी हिंसा करता है, तो कानून उसके साथ और सख्ती से पेश आता है। यह समाज को यह संदेश देता है कि कानून से बचना संभव नहीं है।
3. महत्वपूर्ण दृष्टांत (Illustrations)
कानूनी दृष्टांत धारा 109 को व्यावहारिक रूप में समझने में मदद करते हैं। BNS में दिए गए उदाहरण बेहद स्पष्ट हैं। आइए इन्हें एक-एक करके देखें:
दृष्टांत (क): क ने य को मारने के आशय से उस पर गोली चलाई। यदि य मर जाता तो यह हत्या होती। इसलिए क धारा 109 के तहत दोषी है — भले ही य बच गया। यह हत्या का प्रयत्न का सबसे सीधा उदाहरण है।
दृष्टांत (ख): क ने एक छोटे बच्चे को सुनसान जगह मरने के लिए छोड़ दिया। बच्चा बच गया, लेकिन क फिर भी दोषी है। यहाँ आशय और ज्ञान का सिद्धांत काम करता है — इरादा ही अपराध को जन्म देता है।
| दृष्टांत | कृत्य | कानूनी निर्णय |
| (क) | गोली चलाई | हत्या का प्रयत्न — दोषी |
| (ख) | बच्चे को छोड़ा | आशय के कारण — दोषी |
| (ग) | बंदूक खरीदी vs चलाई | खरीदना = तैयारी; चलाना = अपराध |
| (घ) | जहर खरीदा vs परोसा | खरीदना = तैयारी; परोसना = अपराध |
अपराध का प्रयास बनाम तैयारी का अंतर यहाँ बहुत महत्वपूर्ण है। बंदूक या जहर खरीदना केवल तैयारी है — यह अपराध नहीं। लेकिन जैसे ही आप उसे इस्तेमाल करने का कदम उठाते हैं, वह प्रयत्न बन जाता है और धारा 109 लागू हो जाती है। यही difference between preparation and attempt law का सार है।
Conclusion
Section 109 of BNS in Hindi भारतीय आपराधिक कानून का एक मजबूत स्तंभ है। यह धारा न केवल हत्या के प्रयत्न को परिभाषित करती है बल्कि आशय, ज्ञान और कृत्य के बीच की महीन रेखा को भी स्पष्ट करती है। BNS 2023 आपराधिक प्रावधान के तहत यह धारा पुराने IPC से ज्यादा व्यापक और स्पष्ट है।
अगर आप कानून की पढ़ाई कर रहे हैं या किसी केस से जुड़े हैं, तो इस धारा को अच्छी तरह समझना जरूरी है। फौजदारी कानून भारत में तेजी से बदल रहा है और BNS इस बदलाव की नींव है। हमेशा किसी योग्य वकील से सलाह लें क्योंकि हर मामले की परिस्थितियाँ अलग होती हैं।

Arjun Sethi is a legal researcher and columnist specializing in constitutional and comparative law. A graduate of NALSAR University, he has published in leading law journals and advised policy think tanks. His work bridges theory and practice, offering readers precise, well-researched insights grounded in academic rigor and ethical clarity.
